एक शख्स के 389 बच्चे… पश्चिम बंगाल में SIR में भारी गड़बड़ी आई सामने, अफसरों के उड़े होश

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच कुछ ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने चुनाव आयोग से लेकर आम जनता तक को हैरत में डाल दिया है। राज्य की वोटर लिस्ट में मानवीय या तकनीकी गड़बड़ी के ऐसे उदाहरण मिले हैं, जिन पर यकीन करना मुश्किल है। कहीं एक व्यक्ति को सैकड़ों लोगों का पिता बता दिया गया है तो कहीं बच्चों की संख्या सैकड़ों में दर्ज है।
वोटर लिस्ट के डेटा के अनुसार बीरभूम जिले की नानूर विधानसभा सीट पर एक ही व्यक्ति के नाम के आगे 389 मतदाताओं को उनकी संतान के रूप में दर्ज किया गया है। मामला यहीं नहीं थमता; हावड़ा के सांकराइल में 310 और मुर्शिदाबाद में 199 मतदाताओं का अभिभावक एक ही व्यक्ति को दिखाया गया है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और आसनसोल जैसे जिलों से भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक ही व्यक्ति के 100 से लेकर 170 तक बच्चे कागजों पर दर्ज हैं।
राज्य में 2.06 लाख से अधिक ऐसे मामले हैं, जहां एक मतदाता के 6 से ज्यादा बच्चे दिखाए गए हैं। करीब 8682 लोग ऐसे हैं, जिनके बच्चों की संख्या 10 से अधिक दर्ज है।
इन विसंगतियों के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका सीधा आरोप है कि केंद्र सरकार और भाजपा, चुनाव आयोग के साथ मिलकर साजिश रच रही हैं। ममता बनर्जी का दावा है कि वैध मतदाताओं को जानबूझकर मृत घोषित कर उनके नाम काटे जा रहे हैं। यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक जा पहुंचा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद सुप्रीम कोर्ट में इस प्रक्रिया को चुनौती दी है और तीन जजों की बेंच के सामने राज्य का पक्ष रखते हुए खुद दलीलें पेश की हैं।
इन गड़बड़ियों के उजागर होने के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर इन विसंगतियों पर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने 9 फरवरी तक विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है, ताकि यह साफ हो सके कि यह महज क्लर्कियल गलती है या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह है।




