निर्मल आत्मस्वरूप ही उत्तम शौच धर्म है: भाई सुरेश मोदी

रायपुर: रविवार को अमलतास केसल, कचना स्थित श्री 1008 मुनिसुव्रत नाथ मंदिर में चल रहे दसलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर ” उत्तम शौच “धर्म मनाया गया।जिसके अंतर्गत प्रातः 7. 25 बजे 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान को पांडुक शिला पर विराजमान कर अभिषेक , शांति धारा की गई, जिसमे प्रथम शांति धारा करने का सौभाग्य श्री कुलदीप सिंघई परिवार ,दिव्तीय प्रकाश जी छाबड़ा परिवार तृतीय श्री नीरज बाकलीवाल परिवार एवम चतुर्थ डॉ. प्रणय अनिल जी जैन परिवार को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात बड़े ही आनंद पूर्वक संगीत मय सामूहिक पूजन की गई।1008 श्री पुष्पदंत भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।उपरोक्त जानकारी मंदिर के अध्यक्ष हिमांशु जी जैन ने दी।
उत्तम शौच धर्म की विवेचना करते हुए भाई सुरेश मोदी ने बताया कि शौच धर्म का अर्थ है कि शुचिता रखना अर्थात मन से वचन से काय से अपनी आत्मा को पवित्र करना, पवित्रता से अनुराग रखिए , लोभ( लालच ) का कोई अंत नही जिस प्रकार मृग कस्तूरी के लोभ में जीवन भर भटकता है, वैसे ही मानव लोभ से आत्मा को दूषित करता हैऔर इस मोह रूपी संसार में भ्रमण करता रहता है, लोभ से मुक्त निर्मल आत्मस्वरूप ही उत्तम शौच धर्म है।
जिस मानव ने अपने मन को निर्लोभी बना लिया एवं संतोष धारण कर लिया, उसका जीवन परम् शांति को प्राप्त हो जाता है। आज रविवार को दोपहर में बच्चों की चित्रकला की प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसकी जानकारी वीरा महिला मंडल की अध्यक्ष श्री मति शशि पालीवाल द्वारा दी गई कि आज सम्पन्न हुए चित्रकला ( ड्रॉइंग ) प्रतियोगिता में दोनों ग्रुप को मिला कर 14 बच्चों ने उपरोक्त प्रतियोगिता में भाग लिया।
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