छत्तीसगढ़

हजरत बाबा महबूब शाह दातार रहमतुल्लाह अलैह की 120 सालाना उर्स 17 से, तैयारियों में जुटी दरगाह कमेटी

  • 17 जनवरी को आम लंगर तो 19 जनवरी को होगी कुल की फातेहा

कवर्धा । सूफ़ी संत हजरत बाबा महबूब शाह दातार रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर 120वीं सालाना उर्स की तैयारी शुरू हो चुकी है। हर साल की तरह इस वर्ष भी उर्स के आयोजन के लिए दरगाह कमेटी ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है, ताकि यह धार्मिक आयोजन बड़े धूमधाम से संपन्न हो सके। इस धार्मिक आयोजन को लेकर मुतवल्ली हनीफ खान, नायब मुतवल्ली अफजल खान ने बताया कि 17 जनवरी से उर्स शुरू होगी। 19 जनवरी को कुल की फातेहा के साथ समापन होगा। तय शेड्यूल के अनुसार 17 जनवरी को शाम करीब 4 बजे से जुलूस, संदल, चादर शरीफ (नात के साथ) निकल कर शहर का गश्त करता हुआ मजार तक जाएगा। इसके बाद यहां आम लंगर का एहतमाम किया गया है। इसी दिन 8 बजे चिश्तिया ग्रुप द्वारा महफिले नात पढ़ी जाएगी। वहीं, 19 जनवरी को सुबह करीब 6 बजे कुल की फातेहा होगी। वर्तमान में आयोजन को लेकर समिति के लोग लगे हुए है। गुरुवार को यहां साफ-सफाई व टैंट का काम जारी रहा। इस कार्य के लिए तौशिफ खान, जुनेद हिंगोरा, शेख शोएब, इब्राहिम कादरी, मोनू खान समेत अन्य लोगों का सहयोग मिल रहा है। भाईचारे का प्रतीक है उर्स आयोजन समिति से जुड़े इमरान खान, शोएब मेमन ने बताया कि कवर्धा के गुप्ता मोहल्ला में स्थित बाबा महबूब शाह दातार की मजार एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यह मजार हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के बीच भाईचारे का प्रतीक है, और यहां पर आयोजित होने वाला उर्स पूरे क्षेत्र में धार्मिक सद्भाव का संदेश देता है। बाबा महबूब शाह दातार की दरगाह का उर्स पिछले 120वर्षों से मनाया जा रहा है और यह इलाके में एक अहम धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है।दरगाह की जा रहीं सजावटइस साल उर्स के अवसर पर दरगाह की सजावट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दरगाह के गुम्बद और कलश का रंग-रोगन किया जा रहा है ताकि यह और भी आकर्षक दिखे। साथ ही, मजार को कच्चे फूलों से सजाया जाएगा, और कृत्रिम फूलों का भी उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, पूरे दरगाह परिसर को लाईट झालरों से सजाया जाएगा, जिससे रात में यह और भी सुंदर और रौशन दिखाई देगी। इन सजावटों के कारण, ऐसा प्रतीत होगा जैसे भारत की प्रसिद्ध दरगाह, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार की झलक कवर्धा में देखने को मिल रही हो।शांति व्यवस्था और प्रशासन से सहयोग की अपीलसमिति ने उर्स के इस भव्य आयोजन को शांति और भाईचारे के साथ मनाया जाए। प्रशासन से भी शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहयोग मांगा गया है। उन्होंने सभी समाज के प्रमुखों से यह भी अपील की कि वे कार्यक्रम को शांतिपूर्वक और संयम से मनाने की कोशिश करें, जिससे इस धार्मिक उत्सव का आनंद सभी श्रद्धालु मिलकर ले सकें। उर्स के दिन कवर्धा शहर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ता है। सिर्फ कवर्धा ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों और दूर-दूर से लोग इस धार्मिक अवसर पर शामिल होने आते हैं। यह आयोजन ना सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक सद्भाव का भी प्रतीक है।

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