दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर भी बसंत पंचमी धूमधाम से मनाया गया

नईदिल्ली। बसंत पंचमी हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, लेकिन दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर भी यह त्योहार पिछले 700 सालों से मनाया जा रहा है। इस दिन दरगाह में मुस्लिम समुदाय के लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और हिंदू-मुस्लिम मिलकर उत्सव मनाते हैं। इस परंपरा की शुरुआत हजरत निजामुद्दीन और उनके शिष्य अमीर खुसरो से जुड़ी है। भांजे की मृत्यु के बाद हजरत निजामुद्दीन गहरे शोक में थे। तभी अमीर खुसरो ने बसंत पंचमी का उल्लास उनके जीवन में लौटाने के लिए पीले कपड़े पहनकर, हाथों में पीले फूल लेकर गीत गाते हुए जुलूस निकाला और अपने गुरु के चरणों में फूल अर्पित किए। शिष्य का यह प्रेम देखकर हजरत निजामुद्दीन भावुक हो गए और स्वयं उत्सव में शामिल हो गए। तभी से निजामुद्दीन दरगाह पर हर साल बसंत पंचमी मनाई जाती है, जो आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता की खूबसूरत मिसाल है।




