छत्तीसगढ़

मिश्रित मत्स्य पालन प्रशिक्षण का समापन

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रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर के द्वारा तीन दिवसीय मिश्रित मत्स्य पालन विषय पर प्रशिक्षण आज दिनांक 29 नवम्बर 2025 को समापन हुआ। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड, हैदराबाद द्वारा प्रायोजित था, इस प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ राज्य के अलग- अलग जिलों से कुल 25 प्रशिक्षणार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया ।इस प्रशिक्षण के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अजय कुमार वर्मा, अधिष्ठाता, स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी. इं.गां.कृ.वि. उपस्थित रहे. साथ ही साथ विशिष्ठ अतिथि के रूप में डॉ. एस. आर गौर, प्राध्यापक (मात्स्यिकी) उपस्थित थी। इस कार्यक्रम के उदबोधन में कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गौतम रॉय ने अपने उदबोधन में कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर में चल रहे मछली पालन की विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से सभी को अवगत कराया। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. एस. सासमल ने अपने उद्बोधन में तीन दिवसीय प्रशिक्षण के रूपरेखा को विस्तृत जानकारी दिए। प्रशिक्षण के विशिष्ठ अतिथि डॉ. एस. आर गौर, प्राध्यापक ने आज के समय में मिश्रित मछली पालन क्यों जरूरी है उसके बारे में बतायें। इस दौरान सारे अतिथि द्वारा मिश्रित मत्स्य पालन पद्धति विषय पर तैयार तकनीकी बुलेटिन का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अजय कुमार वर्मा, अधिष्ठाता ने बताया कि छत्तीसगढ़ के साथ साथ पूरे देश में मछली पालन के क्षेत्र में डॉ. एस. सासमल एक जाना पहचाना नाम है यह विश्वविद्यालय के लिए बहुत ही गर्व की बात है। उन्होने यह भी बताया कि सिर्फ भारत से ही नही बल्कि विदेशों से भी प्रशिक्षण लेने के लिए प्रशिक्षनार्थी इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर में प्रशिक्षण लेने आए अन्त में श्री तोषण कुमार ठाकुर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख केविके बेमेतरा ने इस प्रशिक्षण में सम्मिलित हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ठ अतिथि एवं प्रशिक्षनार्थियों का आभार प्रकट किए। इस प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र के बाद दो सत्रों में मिश्रित मत्स्य पालन पद्धति के विषय पर डॉ. एस. आर गौर, प्राध्यापक एवं श्री तोषण कुमार ठाकुर ने विस्तृत रूप से जानकारी दिए ।-प्रशिक्षण के दुसरे दिन डॉ. एस. सासमल एवं डॉ. अंकित ठाकुर ने मिश्रित मछली पालन को प्रायोगिक रूप से कैसे करते है उसके बारे में प्रक्षेत्र में प्रशिक्षण दिये इस कड़ी में तालाबों का चयन, मछली बीज संचयन, खाद प्रबंधन, प्राकृतिक भोजन उत्पादन आदि को प्रायोगिक रूप से दिखायें प्रशिक्षण के अंतिम दिवस में श्री अमित वर्मा, मत्स्य निरीक्षक, मछली पालन विभाग, रायपुर ने मछली पालन में राज्य सरकार तथा केन्द्रीय सरकार के सब्सिडी स्कीम के बारे में विस्तृत जानकारी दी साथ ही साथ किसान कैसे सब्सिडी का लाभ उठा सकते है उसके बारें में भी जानकारी दी। डॉ. एस. सासमल ने मिश्रित मछली पालन पद्धति का शुद्ध आय-व्यय के बारे में जानकारी दिए एवं समन्वित मछली पालन करके आपने आय को कैसे दोगुना किया जा सकता है उसके बारे में भी अवगत करवाए।इस प्रशिक्षण के समापन कड़ी में मुख्य अतिथि श्री कृष्णा चम्पालाल हिरवानी, प्रदेश अध्यक्ष. सहकारिता प्रकोष्ठ, छ.ग. धीवर समाज महासभा एवं विशिष्ठ अतिथि श्री सुशील जलक्षत्री, प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षा एवं संस्कृतिक प्रकोष्ठ, छ.ग. धीवर समाज महासभा एवं मीडिया फेडरेशन ऑफ इण्डिया के छत्तीसगढ़ राज्यप्रदेश सचिव पक्की कर्मा राव उपस्थित थे। डॉ. एस. सासमल, प्रशिक्षण प्रभारी ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण केगतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दिए तथा प्रशिक्षनार्थियों ने अपना अपना अनुभव को सभी के साथ-साझा किए और कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर एवं राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड, हैदराबाद को इस प्रशिक्षण के सफल आयोजन के लिए हृदय से आभार प्रकट किए। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ठ अतिथियों ने प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदाय किए एवं उनके उज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दिये । समापन के मुख्य अतिथि श्री कृष्णा चम्पालाल हिरवानी ने छत्तीसगढ़ में मछली उत्पादन के क्षेत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर का योगदान महत्वपूर्ण है तथा मिश्रित मछली पालन पद्धति अपनाके मत्स्य कृषक अपना मछली उत्पादन को दोगुणा से तीन गुणा तक भी आय प्राप्त कर सकते है। और उन्होने यह भी बताया कि राज्य सरकार के सब्सिडी स्कीमस् का फायदा उठाय और अपने अर्थिक स्थिति को भी मजबुत करें। अंत में मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. एस. सासमल ने इस प्रशिक्षण को सफल बनाने के लिए सभी का हृदय से आभार प्रकट किया एवं साथ ही साथ राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड, हैदराबाद को यह प्रशिक्षण प्रदाय करने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर के ओर से विशेष आभार व्यक्त किया ।

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