छत्तीसगढ़

गारे-पेलमा 2 परियोजना को गति देने ग्रामीणों और महाजेनको अधिकारियों की सीधी मुलाकात: अहम बैठक में विकास पर खुला संवाद

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मुख्य बिंदु:

  • ग्रामवासियों ने परियोजना के शीघ्र निष्पादन की मांग रखी
  • लगभग 14 गाँवों के 4000 परिवार होंगे लाभान्वित
  • रोजगार और पुनर्वास से क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
  • राजकोष में कर योगदान से आर्थिक वृद्धि

20 अगस्त 2025, रायगढ़, ग्राम ढोलनारा: रायगढ़ जिले के ग्राम ढोलनारा में 19 अगस्त 2025 को ग्रामीणों ने महाजेनको कंपनी के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष उल्लेखनीय है कि महाजेनको टीम, कार्यकारी निदेशक के नेतृत्व में, मुंबई से इस बैठक में शामिल होने आई थी ताकि गारे-पेलमा 2 परियोजना को गति दी जा सके।

ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि प्रभावित किसानों को उनकी निजी भूमि और संपत्तियों का उचित मुआवज़ा शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। प्रभावित परिवारों को उनकी योग्यता, कौशल और अनुभव के आधार पर रोजगार दिया जाए तथा विस्थापित परिवारों के लिए पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने यह भी पूछा कि मुआवज़ा मिलने के बाद वे अपनी भूमि पर कब तक रह पाएंगे और कंपनी द्वारा रोजगार कितने वर्षों तक सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा, विस्थापन की स्थिति में रोजगार के स्थान पर एकमुश्त वित्तीय पैकेज का विकल्प दिए जाने की भी मांग की गई।

बैठक में कंपनी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण मुआवज़े की प्रक्रिया कलेक्टर और एसडीएम के साथ समन्वय में चल रही है। जैसे ही प्रशासन से आदेश प्राप्त होंगे, कंपनी मुआवज़ा राशि जमा कर देगी और उसका वितरण शीघ्र शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि खदान की लीज़ 30 वर्षों के लिए स्वीकृत है और पुनर्वास व एकमुश्त सेटलमेंट से जुड़े निर्णय सरकार और प्रशासन के मार्गदर्शन में ही किए जाएंगे। रोजगार संबंधी व्यवस्था भी सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और दरों के अनुसार लागू की जाएगी।

बैठक में उपसरपंच प्रगेआह गुप्ता, पूर्व उपसरपंच संतोष बेहरा, ईश्वर चंद्र गुप्ता, राथू गुप्ता, बूढ़ा गोटिया गुप्ता, सरोज बेहरा, सुंदर राठिया, भक्ति राठिया, विनय गुप्ता, फुलेश्वर राठिया, मिंकतन भगत, घुराउ भगत, राठू चौहान (कोटवार), रमेश्वर भगत सहित लगभग 200 ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन और कंपनी द्वारा उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा, जिससे प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवज़ा, रोजगार और पुनर्वास की सुविधा मिल सके और विकास कार्यों के साथ-साथ सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित हो।

अंत में कंपनी अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों की मांगों और हितों को ध्यान में रखते हुए कंपनी द्वारा जो भी सर्वोत्तम संभव कदम होंगे, वे सरकार के मार्गदर्शन में उठाए जाएंगे ताकि गांव और ग्रामीणों का भविष्य सुरक्षित और बेहतर बन सके। इस परियोजना से 14 गाँवों के लगभग 4000 परिवार लाभान्वित होंगे, जिन्हें बेहतर पुनर्वास और रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से राज्य को राजस्व का योगदान मिलेगा और निवेश से क्षेत्रीय विकास को गति प्राप्त होगी।

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