छत्तीसगढ़

श्रद्धा हो तो पाषाण में भी भगवान दिखते है :मुनि श्री सुयश सागर जी

ADs

रायपुर: अमलतास केसल , कचना स्थित श्री मुनिसुब्रत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य गुरुवर 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सुयोग्य एवं परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 सुयश सागर जी एवं कौशल्य सागर जी महाराज द्वय का पद विहार करते हुए भव्य आगमन हुआ। उपरोक्त जानकारी मंदिर के अध्यक्ष हिमांशु जैन ने दी। श्री सुयश सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि एक दिन था जब मैं इस मंदिर के वेदी प्रतिष्ठा में आया था जब कल्पना थी कि यह मंदिर कैसा होगा, और आज इस मंदिर मंदिर में 1008 श्री मुनिसुब्रत नाथ भगवान के दर्शन के पश्चात कल्पना से ऊपर यह मंदिर का निर्माण हुआ ।अगर मन में सच्ची श्रद्धा हो तो पाषाण में भी भगवान के दर्शन होते है। श्रद्धा से ही मोक्ष फल की प्राप्ति होती है।वस्तु जैसी है वैसी ही होती है देखने का नजरिया अलग अलग होता है कोई नारियल कहता है कोई श्रीफल कहता है,किसी की दृष्टि में पाषाण है और वही श्रद्धा से देखने पर भगवान बिम्बित होते है।सच्ची श्रद्धा के उदय से ही मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।तत्पश्चात सायं को मुनि श्री सुयश सागर जी के मार्गदर्शन में “” संगीतमय णमोकार महामंत्र चालीसा पाठ एवं तीर्थ राज सम्मेद शिखर जी की भक्तिमय यात्रा की गई।विजय जैन 91112 10123

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button