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Income Tax Act 2025 को राष्ट्रपति से मंजूरी, टैक्स रेट पर कोई असर नही; जानें कब होगा लागू

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लाए नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 को अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिल गई है। 21 अगस्त को केंद्र सरकार ने नए नियम को अधिसूचित कर दिए हैं। यह नया एक्ट 1 अप्रैल 2026 से पुराने इनकम टैक्स अधिनियम की जगह लेगा। सरकार ने टैक्स से संबंधित जटिल कानूनों को आसान बनाने के लिए यह नया आयकर विधेयक लेकर आई है। हालांकि, इस एक्ट के लागू होने से टैक्स रेट में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं होगा।

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बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इससे पहले 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में इनकम टैक्स बिल पेश किया था। इसमें टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए इनकम टैक्स एक्ट के शब्दों की संख्या को लगभग 50 फीसदी घटाकर करीब 5 लाख से 2.5 लाख किया गया है।

नए इनकम टैक्स एक्ट में 4 प्रमुख बदलाव

1. इनकम टैक्स बिल में असेसमेंट ईयर को टैक्स ‘ईयर’ से रिप्लेस किया गया है। बिल के पन्ने 823 से घटकर 622 रह गए हैं। हालांकि, चैप्टर्स की संख्या 23 ही है। सेक्शन 298 से बढ़ाकर 536 कर दिए गए हैं और शेड्यूल्स भी 14 से बढ़कर 16 हो गए है।

2. क्रिप्टो एसेट्स को किसी भी अनडिस्क्लोज्ड इनकम के तहत गिना जाएगा, जैसे अभी नकदी, बुलियन और ज्वेलरी को शामिल किया जाता है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन को भी पारदर्शी और कानूनी तरीके से कंट्रोल किया जा सके।

3. बिल में टैक्सपेयर्स चार्टर को शामिल किया गया है, जो टैक्स पेयर्स के अधिकारों को प्रोटेक्ट करेगा और टैक्स प्रशासन को ज्यादा ट्रांसपेरेंट बनाएगा। यह चार्टर टैक्सपेयर्स के हितों की रक्षा करने के साथ टैक्स अधिकारियों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को भी साफ करेगा।

4. सैलरी से संबंधित कटौतियां, जैसे कि स्टैंडर्ड डिडक्शन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट को अब एक ही जगह पर लिस्ट कर दिया गया है। पुराने कानून में मौजूद मुश्किल एक्सप्लेनेशन और प्रावधानों को हटा दिया गया है, जिससे टैक्सपेयर्स के लिए इसे समझना आसान हो जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से भी ली गई सलाह

इस काम में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के करीब 150 अफसरों की कमेटी लगी थी। नए बिल को अंतिम रूप देने में 60 हजार से ज्यादा घंटे लगे। इनकम टैक्स बिल को आसान, समझने लायक बनाने और गैर-जरूरी प्रावधान हटाने के लिए 20,976 ऑनलाइन सुझाव मिले। इनका विश्लेषण किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मशविरा किया गया। ऐसे संशोधन कर चुके ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से भी सलाह ली गई। 2009 और 2019 में इस संदर्भ में तैयार किए गए दस्तावेजों का अध्ययन भी किया गया।

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