ईरान ने कभी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की लेकिन हमले का मुकाबला किया है। हमने साक्षरता, उच्च शिक्षा, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा में काफी काम किया है: मसूद पेजेश्कियान

डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन से पहले पेजेश्कियान का संबोधन अमेरिकियों को
तेहरान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी लोगों के नाम खुला खत लिखा है। इस खत में उन्होंने अमेरिका-ईरान युद्ध पर बात करते हुए अपना पक्ष रखा है। पेजेश्कियान ने यह बताने की कोशिश की है कि तेहरान ने हमेशा बातचीत पर जोर दिया लेकिन अमेरिका ने बार-बार उन पर हमले किए हैं। ईरानी राष्ट्रपति की खुली चिट्ठी डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र को संबोधित करने से कुछ घंटे पहले सामने आई है। ट्रंप ने बुधवार को ईरान युद्ध पर कुछ अहम ऐलान करने की बात कही है।मसूद पेजेश्कियान ने अपने खत में अमेरिकी लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि ईरानी लोगों के मन में किसी दूसरे राष्ट्र के प्रति कोई शत्रुता नहीं हैं। वह अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों को दुश्मन नहीं मानते हैं। इतिहास में बार-बार विदेशी हस्तक्षेपों का सामना करने के बावजूद ईरानियों ने हमेशा सरकारों और उन सरकारों के अधीन रहने वाले लोगों के बीच स्पष्ट अंतर किया है। यह ईरानी संस्कृति और सामूहिक चेतना का सिद्धांत है ना कि कोई अस्थायी राजनीतिक रुख है।अमेरिका ने 1953 में ईरान में देखल देकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित किया और तानाशाही को स्थापित कर दिया। अमेरिका ने शाह को समर्थन देकर लोगों को दबाया। अमेरिका ने ईरान पर आधुनिक इतिहास के सबसे व्यापक प्रतिबंध लगाए और हलिया समय में बार-बार सैन्य हमले किए हैं। दुनिया एक मुश्किल दौर में: मसूदमसूद पेजेश्कियान ने आगे लिखा कि आज दुनिया एक चौराहे पर खड़ी है। टकराव और बातचीत के बीच चुनाव वास्तविक और दूरगामी परिणामों वाला फैसला है। इसका नतीजा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा। पेजेश्कियान ने इस बात पर जोर दिया है कि युद्ध के लिए ईरान जिम्मेदार नहीं है। इतिहास की सबसे पुरानी और लगातार बनी रहने वाली सभ्यताओं में से एक होने के बावजूद ईरान कभी हमलावर नहीं रहा है।मसूद लिखते हैं, ‘ईरान ने कभी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की लेकिन हमले का मुकाबला किया है। ईरान ने उनको पूरी दृढ़ता और बहादुरी से पीछे धकेला है, जिन्होंने हमला किया है।’ मसूद ने ईरान-अमेरिका की दुश्मनी की जड़ में भी वॉशिंगटन की ओर से तेहरान में दखल को बताया है। उन्होंने ईरानी-अमेरिकी दुश्मनी की जड़ों को 1953 के तख्तापलट से जोड़ते हुए उसे एक गैर-कानूनी अमेरिकी दखल बताया है।ईरान कमजोर नहीं है। पेजेश्कियान ने कहा है कि अमेरिका ने कई दशकों से ईरान को कमजोर करने के लिए सभी कुछ किया है। इसके बावजूद ईरान कमजोर नहीं हुआ है। अमेरिकी दबाव ईरान को कमजोर करने में नाकाम रहे हैं। इसके विपरीत देश कई क्षेत्रों में और अधिक मजबूत हुआ है इस्लामिक क्रांति के बाद से साक्षरता, उच्च शिक्षा, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा में देश ने काफी काम किया है।ईरानी राष्ट्रपति ने देश के अपनी सुरक्षा के अधिकार पर खासतौर से जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी रक्षा करने का हक है, जो वह कर रहा है। इससे पहले ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया है कि ईरान ने युद्धविराम का अनुरोध किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे बेबुनियाद बताया है।




