रायपुर संभाग के कमिश्नर एम. डी. कावरे ने विज्ञान पुस्तक लेखन कार्यशाला का किया शुभारंभ

राजनांदगाव :-रायपुर संभाग के कमिश्नर एम. डी. कावरे ने विज्ञान पुस्तक लेखन कार्यशाला का दिनांक 7 मार्च 2026 दिन शनिवार को राजनांदगाव मे शुभारंभ किया। विद्यार्थियों को दिया नवाचार और मौलिक लेखन का संदेश रायपुर/राजनांदगांव।छत्तीसगढ़ में विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित विज्ञान विषय पर पुस्तक लेखन कार्यशाला का आयोजन राजनांदगांव के शासकीय दिग्विजय ऑटोनोमस महाविद्यालय में किया गया। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के तत्वावधान में तथा उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन के राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (RUSA 2.0) के सहयोग से आयोजित किया गया कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में रायपुर संभाग के कमिश्नर एम. डी. कावरे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को विज्ञान के क्षेत्र में मौलिक लेखन, शोध और नवाचार के लिए प्रेरित किया।अपने संबोधन में कमिश्नर कावरे ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर क्षेत्र में उपयोगी है। यदि विद्यार्थी विज्ञान को सरल भाषा में लिखें और उसे आम जनता तक पहुंचाएं, तो वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलेगा और समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में विज्ञान संचार और विज्ञान लेखन का महत्व लगातार बढ़ रहा है, इसलिए युवाओं को इस क्षेत्र में आगे आना चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि वे केवल पढ़ाई तक ही सीमित न रहें, बल्कि अपने विचारों और शोध को लेखन के माध्यम से व्यक्त करें। विज्ञान पर आधारित पुस्तकें और लेख समाज में जागरूकता फैलाने का एक प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने भी विज्ञान लेखन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल और रोचक भाषा में प्रस्तुत किया जा सकता है। इस कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान पर आधारित पुस्तक लेखन की तकनीक, विषय चयन, शोध पद्धति और प्रस्तुतीकरण के बारे में जानकारी दी जा रही है।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विज्ञान संचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया गया कि वे विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए भी इसका उपयोग करें।इस अवसर पर विश्वास मेश्राम, अपर कलेक्टर एवं नोडल कॉर्डिनेटर – विज्ञान लोकप्रियकरण कार्यक्रम (RUSA 2.0) ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें विज्ञान लेखन के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं, जहां वे अपने विचारों को विकसित कर सकते हैं और विज्ञान को समाज तक पहुंचाने में योगदान दे सकते हैं।कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को विज्ञान के प्रचार-प्रसार और युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।




