छत्तीसगढ़

सबका साथ–सबका विकास और स्कूल आ पढ़े बर- जिनगी ल गढ़े बर जैसे नारे गढ़ने वाले छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र उमेश मिश्र की रोचक कहानी

*नव जनसंपर्क कर्मियों के लिए प्रेरणा*

ADs ADs

छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरा कर लिया है। यह केवल विकास का उत्सव नहीं, बल्कि उन अनगिनत कर्मयोगियों की श्रमगाथा का उत्सव भी है, जिन्होंने परदे के पीछे रहकर राज्य की दिशा, नीति और छवि गढ़ी। ऐसे ही मौन और सृजनशील कर्मयोगियों में एक प्रमुख नाम है उमेश कुमार मिश्र।लगातार 24 वर्ष तक मुख्यमंत्री सचिवालय में कार्य कर उन्होंने शासन, प्रशासन और जनसंचार की धुरी में स्वयं को स्थापित किया। रायपुर के फूलचौक- नयापारा निवासी श्री मिश्र का सफर पत्रकारिता से शुरू हुआ। देशबन्धु समाचार पत्र में उनकी लेखनी ने ऐसी पहचान बनायी कि 1991 में वे रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष बने।पत्रकारिता से अर्जित भाषा की साफगोई, संवेदना और दृष्टि ने आगे चलकर उन्हें शासन के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुँचा दिया। राज्य निर्माण के समय उन्हें जबलपुर से विशेष रूप से बुलाया गया। वहाँ से उनका सृजन-यात्रा आरंभ हुई, जो मुख्यमंत्रियों श्री अजीत जोगी, डॉ. रमन सिंह और वर्तमान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कार्यकाल तक निरंतर जारी रही।*राज्य की नीति, दृष्टि और धारणा को शब्द देकर गढ़ी पहचान*स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, विधानसभा सत्र, नीति आयोग बैठकें, राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के दौरों ऐसे प्रत्येक अवसर पर प्रदेश की नीतियों को विचार की भाषा देने का काम श्री मिश्र करते रहे।उनकी लेखनी ने ‘विकास यात्रा’, ‘लोक सुराज’ एवं ‘ग्राम सुराज अभियान’, ‘रमन के गोठ’ और ‘लोकवाणी’ जैसे लोक-संवाद अभियानों को लोक-भाषा दी। संदेश को जनता तक सीधे पहुँचाने वाली यह शैली छत्तीसगढ़ प्रशासन की संप्रेषण पहचान बन गई।*नारे जिन्होंने राज्य की छवि बदली*कई ऐसे नारे जो आज सामान्य बोलचाल में प्रचलित हैं, वास्तव में श्री मिश्र की रचनात्मक सोच की देन हैं सबका साथ–सबका विकास, स्कूल आ पढ़े बर- जिनगी ल गढ़े बर, सौर सुजला, हेलमेट जागरूकता के भावनात्मक स्लोगन और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट आयोजन की लोकप्रिय लाइन “अब होगी हैट्रिक”।इन्होंने सरकारी योजनाओं को नारा नहीं, बल्कि आंदोलन बनाया। 3 रूपए किलो चावल’ योजना के प्रचार के लिए विशेष सिक्का डिजाइन और उसका राज्यव्यापी संचार उनका ही सृजन था। यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गया।*संवेदनशील क्षणों में संतुलन, शब्द और समझ*वर्ष 2013 के घातक नक्सली हमले के बाद प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की उपस्थिति में जारी प्रेस बयान मात्र कुछ ही मिनटों में सटीक और संतुलित रूप में तैयार करना श्री मिश्र की क्षमता का प्रमाण था। जिसे स्वयं मुख्य सचिव ने राज्य की गंभीरता और गरिमा का प्रतीक कहा।*सृजन की टीम और साथ में विजय मानिकपुरी*मुख्यमंत्री सचिवालय में उनके सबसे विश्वसनीय सहयोगी रहे जनसंपर्क अधिकारी विजय मानिकपुरी। श्री मिश्र मुस्कुराते हुए कहते हैं मानिकपुरी मेरे लिए 108 इमरजेंसी सेवा जैसे हैं।यह जोड़ी सचिवालय में रात्रि 6 बजे से लेकर भोर 6 बजे तक निरंतर सृजन में लगी रहती थी।कक्ष क्रमांक 379 (पुराना मंत्रालय) से लेकर महानदी भवन के कक्ष M-5 तक।श्री मिश्र ने मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव, छत्तीसगढ़ संवाद के निदेशक, जनसंपर्क विभाग के संयुक्त सचिव.जैसे पदों पर 13 वर्ष से अधिक मंत्रालय में कार्य किया। उनकी पहचान लो-प्रोफाइल, उच्च-योग्यता, सौम्य व्यवहार और संगठन संचालित नेतृत्व के रूप में रही।वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी में अतिरिक्त महाप्रबंधक (जनसंपर्क) के रूप में अपनी रचनाशीलता का योगदान दे रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button