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बीएनपी ने वादा किया है कि वह तीस्ता और पद्मा जैसी साझा नदियों से बांग्लादेश का उचित हिस्सा हासिल करने के लिए प्रभावी उपाय करेगी।

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नदी जल बंटवारा बांग्लादेश की राजनीति का सबसे भावनात्मक मुद्दा रहा है।

India-Bangladesh: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले 13वें संसदीय चुनावों से ठीक पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। बीएनपी ने भारत के साथ जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों सीमा पर गोलीबारी, घुसपैठ और लंबित नदी-जल बंटवारे को अपनी विदेश नीति के केंद्र में रखा है। पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान द्वारा जारी इस घोषणापत्र में ‘बांग्लादेश बिफोर ऑल’ का सिद्धांत दिया गया है, जो सत्ता में वापसी की स्थिति में भारत के प्रति एक अधिक आक्रामक और मुखर रुख अपनाने का संकेत देता है।

बीएनपी ने अपनी विदेश नीति को समानता और आत्म-सम्मान के ढांचे में पेश किया है। घोषणापत्र का सबसे चर्चित नारा है “मित्र हां, मास्टर नहीं”। इसके माध्यम से पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ढाका किसी भी दूसरे देश के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा और न ही किसी दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीधा प्रहार अवामी लीग के उस कार्यकाल पर है जिसे बीएनपी अक्सर विदेशी प्रभाव वाला शासन करार देती रही है।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर होने वाली मौतों और तस्करी को बीएनपी ने अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है। घोषणापत्र में वादा किया गया है कि भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा की जाने वाली कथित गोलीबारी को रोकने के लिए कठोरतम रुख अपनाया जाएगा। साथ भारत द्वारा औपचारिक प्रक्रिया के बिना लोगों को सीमा पार भेजने के आरोपों पर बीएनपी ने सख्त आपत्ति जताई है और इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की बात कही है। नशीले पदार्थों और मानव तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

नदी जल बंटवारा बांग्लादेश की राजनीति का सबसे भावनात्मक मुद्दा रहा है। बीएनपी ने वादा किया है कि वह तीस्ता और पद्मा जैसी साझा नदियों से बांग्लादेश का उचित हिस्सा हासिल करने के लिए प्रभावी उपाय करेगी।

पार्टी ने चीन समर्थित तीस्ता रिवर मास्टर प्लान और पद्मा बैराज परियोजना को आगे बढ़ाने का समर्थन किया है। इसके साथ ही, साझा नदियों के प्रबंधन के लिए बने संयुक्त नदी आयोग को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया है।

बीएनपी ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को फिर से प्रभावी बनाने का वादा किया है, जो पिछले कई वर्षों से भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण सुस्त पड़ा है। साथ ही बांग्लादेश की किसी एक देश पर निर्भरता कम करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान (ASEAN) की सदस्यता हासिल करने की भी योजना बनाई गई है।

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