छत्तीसगढ़

कृष्णा विकास ग्लोबल यूनिवर्सिटी में ‘रिसर्च प्रपोज़ल टू पब्लिकेशन’ विषय पर विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन

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_उस्मानिया विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ डॉ. पी. हिमा बिंदु ने सशक्त प्रपोज़ल बनाने, मैनुस्क्रिप्ट की तैयारी और फर्जी जर्नल्स से बचने की साझा कीं व्यावहारिक रणनीतियां।_इस सत्र में उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद के भौतिकी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पी. हिमा बिंदु ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए। यह सत्र प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 1:00 बजे तक आयोजित किया गया। इस दौरान संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं शोधकर्ताओं को अकादमिक प्रकाशन की प्रक्रिया को समझने तथा शोध पत्रों को सफलतापूर्वक प्रकाशित कराने हेतु व्यावहारिक एवं चरणबद्ध रणनीतियों से अवगत कराया गया।कार्यक्रम में कृष्णा विकास ग्लोबल यूनिवर्सिटी, रायपुर के कुलपति प्रो. वाय. नरसिम्हुलू, कुलसचिव डॉ. रितेश कुमार देवांगन, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. सीमा अग्रवाल एवं परीक्षा नियंत्रक डॉ. संदीप कुमार सोनकर सहित विश्वविद्यालय के गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।*सत्र के उद्देश्य:* 1. शोध प्रक्रिया को समझना 2. एक सशक्त शोध प्रस्ताव तैयार करना 3. नैतिक और व्यवस्थित तरीके से शोध करना 4. शोध आंकड़ों का विश्लेषण और व्याख्या करना 5. वैज्ञानिक शोध-पत्र लिखना 6. प्रकाशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण करनाडॉ. हिमा बिंदु ने भौतिक विज्ञान और शोध के क्षेत्र में अपने विस्तृत अनुभव का उपयोग करते हुए शोध प्रस्ताव के *प्रारूपण* से लेकर *इंडेक्स्ड जर्नल* में प्रकाशन तक की प्रक्रिया को सरल और स्पष्ट रूप से समझाया। उनके व्यवस्थित प्रस्तुतीकरण में शैक्षणिक कार्य के महत्वपूर्ण चरणों को शामिल किया गया, जैसे प्रभावी शोध प्रश्नों का निर्धारण, उपयुक्त *जर्नल* का चयन तथा नैतिक प्रकाशन मानकों का पालन।*संबोधन के मुख्य बिंदु**प्रपोज़ल स्ट्रक्चरिगं:* ग्रांट और इंस्टीट्यूशनल अप्रवूल दिलाने वाले आकर्षक रिसर्च प्रपोज़ल्स के ज़रूरी हिस्से।*लिटरेचर और मेथडोलॉजी:* एक मज़बतू थ्योरेटिकल फ्रेमवर्क बनाने के लिए मेथड की सख्ती और सिस्टेमेटिक लिटरेचर सिंथेसिस।*मैनुस्क्रिप्ट तैयारी:* मैनुस्क्रिप्ट ड्राफ्टिंग, क्लियर डेटा प्रेजेंटेशन और एडिटोरियल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बेस्ट प्रैक्टिस।*एथिकल स्टैंडर्ड:* रिसर्च की ईमानदारी पर ज़ोर, प्रिडेटरी/फर्जी प्रकाशन से बचना, और रिवीवर के कमेंट्स को कंस्ट्रक्टिव तरीके से देखना।सत्र का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने डॉ. पी. हिमा बिंदु से प्रकाशन संबंधी चुनौतियों, इम्पैक्ट फैक्टर और शोध प्रसार की रणनीतियों पर सीधे संवाद किया। उपस्थित लोगों ने सत्र की व्यावहारिक स्पष्टता और समकालीन शैक्षणिक मानकों के अनुरूप प्रासंगिकता की सराहना की। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संदीप कुमार सोनकर, परीक्षा नियंत्रक, केवीजीयू रायपुर द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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