अजमेर शरीफ का सालाना उर्सपाक 22 दिसंबर से शुरू, छठी शरीफ की फातेहा 27 दिसंबर को होगी


- हो मुबारक चिश्तियों खुशियां मनाओ, रहमत लेकर मेरे ख़्वाजा का मेला आ गया।
रायपुर/अजमेर। हर साल की तरह इस साल भी हज़रत ख़्वाजा गरीब नवाज़ मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेर शरीफ का सालाना उर्स पाक का आगाज़ 17 दिसंबर से शुरू हो गया है। अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम जनाब हाजी सैयद अमजद हुसैन चिश्ती और सैयद अजमत हुसैन चिश्ती गुड्डा भाई ने बताया कि 17 दिसंबर को बुलंद दरवाजा में झंडा चढ़ाने की रस्म अदा की गई और उर्स का आगाज़ हुआ। माहे रजब का चांद दिखने के बाद इंशा अल्लाह 22 दिसंबर से अजमेर शरीफ का उर्सपाक शुरू हो जाएगा। सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती गरीब नवाज का सालाना उर्सपाक बड़े शानो शौकत से मनाया जाता है। जिसमें भारत के प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित विदेश के राष्ट्रध्यक्ष की ओर से भी चादर पेश किया जाता है। बड़ी तादात में विदेशी जायरीन भी अजमेर शरीफ आते हैं। यह सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला रहता है और इस दौरान जिक्र, कव्वाली, और झंडा चढ़ाने जैसी रस्में होती हैं, जिसमें दुनियाभर से लाखों जायरीन आते हैं. 2025 में 814 वां सालाना उर्सपाक 22 दिसंबर से शुरू होकर 27 दिसंबर तक चलेगा।सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने प्रेम और सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता का संदेश दिये थे इसलिए उन्हें ख़्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से भी जाना जाता है। उर्स की शुरुआत बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने की रस्म से होती है जिसे फ्लेग सेरेमनी भी कहा जाता है। उर्स के दौरान जन्नती दरवाजा खोला जाता है। दरगाह परिसर में रातभर कव्वाली और ज़िक्र की महफिल चलते रहती है। उर्स का आखिरी और महत्वपूर्ण दिन 27 दिसंबर को है जिसमें छठी शरीफ की फातेहा होती है जिसमे शामिल होने देश विदेश के लोग भी पहुंचते हैं।यह भारत का सबसे बड़ा मुस्लिम मेला माना जाता है, लेकिन हर धर्म के लोग इस मेले में शामिल होते हैं। लाखों की तादात में जायरीन इस दौरान अजमेर शरीफ पहुंचते हैं जिसमें हिन्दू मुस्लिम सिख, ईसाई के अलावा अन्य धर्मावलंबी रहते हैं।भारी भीड़ को देखते हुए शासन प्रशासन द्वारा कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं, जिसमें चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात रहती हैं।रायपुर छत्तीसगढ़ से भी हर साल जायरीन अजमेर शरीफ जाते हैं। बैजनाथपारा एथलेटिक क्लब चादर गरीब नवाज़ कमेटी के सरपरस्त हाजी अमीनुद्दीन अमीन मास्टर साहब ने जनता से रिश्ता के राज. संपादक ज़ाकिर घुरसेना को बताया कि पिछले 56 सालों से क्लब की जानिब से चादर पेश किया जा रहा है जो आज तक बदस्तूर जारी है। क्लब के मेंबर चादर लेकर अजमेर शरीफ जाते हैं और वहां दरगाह ख़्वाजा गरीब नवाज़ में पेश कर अमन, चैन और खुशहाली की दुआ करते हैं।




