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रेल बजट में 3 लाख करोड़ का प्रावधान, पर एक्सपर्ट का दावा- ‘आधा बजट तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा!’

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आम बजट 2026-27 में वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा रेलवे के लिए घोषित लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के प्रावधानों को लेकर जहां सरकार इसे ऐतिहासिक और विकासोन्मुख बता रही है। वहीं, यात्रियों सुविधाओं और रियायतों से मुंह मोड़कर केवल हाई स्पीड कारिडोर पर फोकस करने पर असंतोष भी सामने आ रहा है।

पैसेंजर एमेनिटी कमेटी के पूर्व सदस्य डॉ. अशोक त्रिपाठी ने बजट में वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली रियायतों को एक बार फिर नजरअंदाज किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि घोषित बजट में से आधा यानि करीब डेढ़ लाख करोड़ तो भ्रष्टाचार की खा जायेगा।

उन्होंने रेल मंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें रियायतों को रेलवे के नुकसान का कारण बताया गया है। उन्होंने कहा कि क्या देश के वरिष्ठ नागरिक बोझ हैं। एक ओर सीनियर सिटीजन बढ़ती टिकट दरों का आर्थिक बोझ झेल रहे हैं। दूसरी ओर, रेल मंत्री की व्यक्तिगत आर्थिक प्रगति बेलगाम हो चुकी है। उनका आईटी रिटर्न 5,000 गुना से बढ़ चुका है। ये तेजी कई सवाल खड़े करती है

उन्होंने स्वीकार किया कि युवाओं के लिए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और तेज ट्रेनों की जरूरत है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि वरिष्ठ नागरिकों को बुनियादी सहूलियतें और रियायतें मिलें। मौजूदा रेल बजट वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत की बजाय निराशा लेकर आया है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेल, बिलासपुर जोन के जेडआरयूसीसी सदस्य बृजभूषण शुक्ला ने रेलवे के दृष्टिकोण से इस बजट को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि 2,78,030 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन दीर्घकालिक विकास और राष्ट्र निर्माण को गति देगा। करीब ४०० वंदे भारत स्लीपर ट्रेन तथा 1700 अमृत भारत कोचेज के जरिए आधुनिक और सुलभ परिवहन हेतु यह बजट ऐतिहासिक है।

मध्य रेल, मुंबई जोन के जेडआरयूसीसी सदस्य धर्मेन्द्र आचार्य ने कहा कि यह बजट प्रगतिशील प्रतीत होता है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया। हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को एक स्वागत योग्य कदम माना जा सकता है। इससे यात्रा का समय कम होगा और साथ ही माल परिवहन भी अधिक सुगम और तेज होगा। उनके अनुसार, हाई स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल यात्रियों के समय की बचत करेंगे, बल्कि उद्योग और व्यापार के लिए भी माल ढुलाई को अधिक प्रभावी बनाएंगे, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।

इन सकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बीच नागपुर को लेकर नाराजगी की आवाज भी तेज है। भारतीय यात्री केन्द्र के सचिव बसंत कुमार शुक्ला ने कहा कि वर्षों से नागपुर से दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, प्रयागराज, रायबरेली, अयोध्या जैसे शहरों और धार्मिक स्थलों के लिए नई सीधी ट्रेनों की मांग की जा रही है, लेकिन इस बार इन मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की सूची में नागपुर का नाम शामिल न होना भी निराशाजनक है।

पूर्व जेडआरयूसीसी सदस्य प्रवीण डबली ने कहा कि बजट में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा यात्रा समय में कमी के साथ व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देगी। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर जोर उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाएगा। नई रेलवे लाइनों, आधुनिक कोचों, उन्नत सिग्नलिंग और ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली के लिए बढ़ा आवंटन यात्रियों की सुरक्षा और सेवा गुणवत्ता को प्राथमिकता देता है।

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