छत्तीसगढ़

सांपों के साथ सह-अस्तित्व का संदेश, सोनबरसा में रेस्क्यू एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

ADs

वन्यजीव संरक्षण के लिए बलौदाबाजार वनमंडल की अभिनव पहल

वन अमले और युवाओं को विषैले-अविषैले सांपों की पहचान तथा सुरक्षित रेस्क्यू का दिया गया प्रशिक्षण

रायपुर, 

 सांपों के साथ सह-अस्तित्व का संदेश, सोनबरसा में रेस्क्यू एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन
 सांपों के साथ सह-अस्तित्व का संदेश, सोनबरसा में रेस्क्यू एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

सांपों के साथ सह-अस्तित्व का अर्थ है उनके प्राकृतिक व्यवहार को समझना, डर को कम करना और सुरक्षित तरीके अपनाना। सांप पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी हैं क्योंकि वे चूहों और कीटों की संख्या को नियंत्रित रखते हैं। घर के आसपास घास, लकड़ी के ढेर या कबाड़ न जमा होने दें ताकि सांपों को छिपने की जगह न मिले। घर के आसपास चूहों व अन्य कृन्तकों को न पनपने दें, क्योंकि भोजन की तलाश में ही सांप घरों का रुख करते हैं।

वन्यजीव संरक्षण और जनजागरूकता की दिशा में अभिनव पहल

                वन मंत्री श्री केदार कश्यप के वन्यजीव संरक्षण के व्यापक विजन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के मार्गदर्शन में बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा वन्यजीव संरक्षण और जनजागरूकता की दिशा में अभिनव पहल की गई। वनमंडल द्वारा सोनबरसा वन विहार में ‘सांपों के साथ सह-अस्तित्व : स्नेक रेस्क्यू एंड अवेयरनेस वर्कशॉप-2026’ का सफल आयोजन किया गया।

अविषैले सांपों की पहचान और सुरक्षित रेस्क्यू के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी

                 कार्यशाला का उद्देश्य वन विभाग के मैदानी अमले और युवाओं में सांपों को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना तथा उनके प्रति वैज्ञानिक समझ विकसित करना था। कार्यशाला में विषैले और अविषैले सांपों की पहचान, उनके व्यवहार, पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका और सुरक्षित रेस्क्यू के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

वैज्ञानिक जानकारी से दूर की गईं भ्रांतियां

मानव-सर्प संघर्ष को कम करने के उपायों पर चर्चा

                  कार्यशाला के पहले सत्र का आयोजन वनमंडल कार्यालय, बलौदाबाजार में किया गया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को विभिन्न प्रजातियों के सांपों की पहचान, उनके व्यवहार और पर्यावरण संतुलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानकारी दी। सर्पदंश से जुड़ी भ्रांतियों, आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार, रेस्क्यू के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों तथा मानव-सर्प संघर्ष को कम करने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

सोनबरसा वन विहार में दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण

                 कार्यशाला के दूसरे सत्र का आयोजन सोनबरसा वन विहार में किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने सर्प रेस्क्यू का लाइव प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को रेस्क्यू उपकरणों के सुरक्षित उपयोग और सांपों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से प्राकृतिक आवास में छोड़ने की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने साझा किया अपना अनुभव

               कार्यशाला में फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (FES) छत्तीसगढ़ की स्टेट लीड डॉ. मंजीत कौर बाल, शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज बेरला, बेमेतरा के मैकेनिकल विभागाध्यक्ष डॉ. जगपाल सिंह बाल तथा FES के प्रोजेक्ट मैनेजर श्री नरेंद्र कुमार यादव, श्री अंचल ठाकुर और श्री मानव राज ने विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों के रूप में प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से सर्प रेस्क्यू की नवीन तकनीकों की जानकारी दी।

वन अमले और ‘युवान’ वॉलंटियर्स ने लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा

               कार्यशाला में बलौदाबाजार वनमंडल के विभिन्न वन परिक्षेत्रों से वन अधिकारी, कर्मचारी, सुरक्षा श्रमिक और ‘युवान (YUVAN)’ वॉलंटियर्स शामिल हुए। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान किया और वन्यजीव संरक्षण में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने कहा कि सांप प्रकृति और पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके प्रति वैज्ञानिक समझ और जागरूकता विकसित कर ही मानव-सर्प संघर्ष को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम वन अमले की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में वन्यजीवों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

                कार्यशाला के सफल आयोजन में वन विभाग और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (FES) के बीच प्रभावी समन्वय रहा। आयोजन में वन परिक्षेत्र अधिकारी बलौदाबाजार सुश्री एकता कर और उनके समस्त स्टाफ का विशेष योगदान रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button