पर्युषण महापर्व – आत्मशुद्धि का पर्व




आठ दिवसीय अखंड नवकार जाप व खाद्य संयम दिवस
रायपुर। 20 अगस्त से जैन श्वेताम्बर धर्म का पर्युषण महापर्व प्रारम्भ हो रहा है l आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या समणी निर्देशिका कमलप्रज्ञा जी आदि समणी वृन्द 3 के सान्निध्य मे तेरापंथ अमोलक भवन, सदर बाजार मे आठ दिवसीय यह विशुद्ध आध्यात्मिक पर्व प्रारम्भ हो रहा है प्रथम दिन को खाद्य संयम दिवस के रूप मे मनाया जायेगा.
समणी वृंद द्वारा प्रतिदिन प्रातः 8:40 से प्रवचन, संध्याकालीन प्रतिक्रमण, अर्हत वंदना एवं रात्रिकालीन प्रवचन रहेगा. इस आध्यात्मिक अनुष्ठान मे बड़ी संख्या मे श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है.
जैन धर्म का सर्वोच्च आध्यात्मिक पर्व पर्युषण आत्मसंयम, तपस्या और मैत्री व क्षमायाचना का संदेश देता है।
आठ दिनों तक चलने वाला यह पर्व आत्मनिरीक्षण, उपवास, स्वाध्याय और साधना का पावन अवसर है।
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी धर्मसंघ द्वारा पर्युषण आराधना का आयोजन अत्यंत अनुशासित, साधना-प्रधान और सामूहिक भावना से होता है। पर्युषण को तेरापंथ धर्मसंघ में आत्मशुद्धि और आत्मजागरण का सर्वोच्च पर्व माना जाता है। आचार्य प्रवर की आज्ञा और मार्गदर्शन में साधु-साध्वी, समणी, श्रावक-श्राविकाएँ पूरे अनुशासन के साथ आराधना में भाग लेते हैं।
इस अवधि में प्रतिदिन प्रातःकालीन सामूहिक स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण, नवकारसी एवं प्रवचन होते हैं। तप, स्वाध्याय और संयम की विशेष साधना की जाती है। श्रावक-श्राविकाओं को अनशनों, एकासन, उपवास, पौषध, और संयम के विविध उपक्रम अपनाने का अवसर मिलता है।
तेरापंथ धर्मसंघ की विशेषता यह है कि यहाँ पर्युषण केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक साधना का पर्व है। इस दौरान अहिंसा, अपरिग्रह और अणुव्रतों की भावना का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किया जाता है। समाज स्तर पर भी “जीवन सुधार”, “आत्मशुद्धि” और “संयम की साधना” के संदेश दिए जाते हैं।
अंत में क्षमापना आयोजन होता है जिसमें सभी एक-दूसरे से खमत खामणा कहते हुए क्षमा याचना करते हैं और क्षमा प्रदान करते है.
यह पर्व आत्मकल्याण के साथ-साथ समाज में सामंजस्य और प्रेम का वातावरण निर्मित करता है।