दीनी मामले में वक्फ बोर्ड का दख़ल अवैधानिक: मुस्लिम जमात
रायपुर। वक्फ बोर्ड के नए आदेश से मुस्लिम समाज ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि बयान जारी करने के पहले वक्फ एक्ट को पढ़ने की जरूरत है। जमात के दानिशमंदों ने कहा कि राज्य सरकार /कलेक्टर द्वारा नियुक्त क़ाज़ी निकाह पढ़ायेगा प्रमाण पत्र देगा अगर मुस्लिम ऐसी माँग करते हैं तो उसकी और नायब क़ाज़ी की नियुक्ति होगी ये क़ाज़ी मुंसिफ़ या मजिस्ट्रेट नहीं होता न कोई अपने आपको इस्लामी कोर्ट कह सकता न कोई फ़ैसला दे सकता
पहला छत्तीसगढ़ में इस एक्ट तहत कोई नियुक्ति नहीं हुई न मुस्लिमों से कोई ऐसी माँग की गई सभी स्वयंभू क़ाज़ी है
दूसरा इस एक्ट में सिर्फ़ क़ाज़ी ही निकाह कराएगा ऐसा नहीं है कोई भी निकाह पढ़ा सकता है जैसा छत्तीसगढ़ में रिवाज है लोकल मस्जिद के इमाम निकाह नामाँ लेकर आते हैं निकाह पढ़ाते हैं सर्टिफिकेट देते हैं
एक अच्छी बात नोट करने वाली है कि राजनांदगाँव जामा मस्जिद और मरहूम मौलाना मुहम्मद अली फ़ारूक़ी ने उर्दू अंग्रेजी में निकाह नामा का प्रोफ़ॉर्मा बनाया है सभी अंग्रेज़ी उर्दू का एक जैसा निकाह नामा का ड्राफ्ट बना ले तो बेहतर होगा जिसमे शर्तें दोनों फ़रीक़ को मंज़ूर हो अलग से जोड़ ली जाएँ तीन तलाक के क़ानून बनने के वक़्त मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने निकाह नामा में तब्दीली कर ऐसी बातें जोड़ने की बात कही जिससे लड़की का मुस्तक़बिल सिक्योर हो सके बदक़िस्मती से ऐसा नहीं हो सका अब अपने तौर पर दोनों फ़रीक़ कर सकते है जैसा कि एक अख़बार की ख़बर है वक़्फ़ बोर्ड के पदाधिकारी की तरफ़ या अध्यक्ष की जानिब से नियम में संशोधन कर निकाह कराने के लिए मौलानाओं का होगा रेजिस्ट्रेशन होगा और “वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों के अनुसार, अगर कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति, आवश्यक दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।”ये किस नियम और किस कानून के तहत दोनों बातें वक़्फ़ बोर्ड लागू कर सकता है ?
अब छतीसगढ़ में Chhattisgarh Freedom of Religion Act, 2026 लागू हो चुका है। इस कानून के तहत बल, धोखा, प्रलोभन, अनुचित प्रभाव या अन्य प्रतिबंधित तरीकों से धर्म परिवर्तन अपराध है। साथ ही, स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए भी जिला प्रशासन (जैसे जिला मजिस्ट्रेट/अधिकृत अधिकारी) के समक्ष निर्धारित घोषणा/आवेदन की प्रक्रिया का प्रावधान रखा गया है। जब एक बालिग़ औरत या मर्द धर्म बदलकर निकाह करना चाहता है चाहती है तो इस एक्ट के तहत उसे अनुमति लेनी होगी उसने अनुमति ले ली तो वक़्फ़ बोर्ड कौन सी ऐसी अथॉरिटी जिससे उसे अनुमति लेनी होगी ?अगर ऐसा बालिग आदमी या औरत बगैर धर्म परिवर्तन किए शादी करना चाहता है तो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कर सकता है ।जो काम वक़्फ़ बोर्ड का है वो काम वक़्फ़ एक्ट के मुताबिक वक़्फ़ बोर्ड और उसके पदाधिकारी करें। दीनी मामलात में बेज़ा मदाख़लत न करें



