छत्तीसगढ़

धान के बदले दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने जिला प्रशासन का विशेष अभियान

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महासमुंद . राज्य शासन के मंशानुरूप जिले में कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं जल संरक्षण आधारित बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा उच्चहन (ऊँची) भूमि में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, रागी, मक्का, कपास एवं अन्य वैकल्पिक फसलों के रकबे में वृद्धि के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देशन में खरीफ सीजन के दौरान किसानों को वैकल्पिक खेती के लिए प्रेरित करते हुए इसे जन-अभियान का स्वरूप दिया गया है।
जिले में वर्ष 2026-27 के लिए धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं अन्य फसलों का 15,150 हेक्टेयर रकबा आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 6,139 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों द्वारा वैकल्पिक फसलों की बुवाई की जा चुकी है, जो लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में सकारात्मक प्रगति को दर्शाता है। विकासखंडवार निर्धारित लक्ष्य के अनुसार महासमुंद में 2,560 हेक्टेयर, बागबाहरा में 3,500 हेक्टेयर, पिथौरा में 2,890 हेक्टेयर, बसना में 2,980 हेक्टेयर तथा सरायपाली में 3,220 हेक्टेयर क्षेत्र में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं अन्य फसलों का विस्तार किया जाना है।
इस विशेष अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने बहुआयामी रणनीति अपनाई है। कृषि विभाग द्वारा गांव-गांव में किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहाँ जल उपलब्धता, मिट्टी की प्रकृति और आर्थिक लाभ को ध्यान में रखते हुए फसल विविधीकरण के महत्व की जानकारी दी जा रही है। खेती बचाओ अभियान के अंतर्गत आयोजित शिविरों में किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बताया गया कि सामान्य भूमि पर दलहन-तिलहन की खेती करने पर कृषकों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ की अनुदान राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही, उच्च भूमि, असिंचित क्षेत्र में दलहन, तिलहन, रागी एवं कपास की खेती करने पर 10,000 रुपये प्रति एकड़ की विशेष अनुदान राशि देने का प्रावधान है।
कृषि उपसंचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि अभियान के तहत किसानों को दलहन एवं तिलहन फसलों के गुणवत्तायुक्त बीजों का नियमित वितरण किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न ग्रामों में मॉडल प्लॉट विकसित कर उन्नत तकनीकों एवं वैकल्पिक खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे किसान प्रत्यक्ष रूप से नई पद्धतियों के लाभों को देख सकें।
कृषि विस्तार अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नियमित रूप से किसानों के संपर्क में रहकर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है तथा फसल चयन, बीज उपचार, उर्वरक प्रबंधन एवं वैज्ञानिक खेती संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। जिला प्रशासन का मानना है कि उच्चहन भूमि में धान की अपेक्षा दलहन एवं तिलहन फसलें अधिक लाभकारी होने के साथ-साथ कम सिंचाई में बेहतर उत्पादन देती हैं। इससे भू-जल संरक्षण, उत्पादन लागत में कमी, मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि तथा किसानों की आय में बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी। दलहन फसलें भूमि में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधारती हैं, जिससे आगामी फसलों को भी लाभ मिलता है। इसी कड़ी में अभियान से प्रेरित होकर ग्राम कस्तुरबोड़ के श्री चैन सिंग मरार ने अपने 1 हेक्टेयर रकबा में धान के बदले मक्का की खेती प्रारंभ कर दी है। ग्राम दाबपाली, चपिया, जमदरहा, पुरूषोत्तमपुर, बोदानवापाली जैसे ग्रामों में किसानों को निरंतर प्रेरित किया जा रहा है।

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