टीएनएफडी को सबसे पहले अपनाने वाली कंपनियों में शुमार हुई वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता एल्युमीनियम ने प्रकृति को रखा अपनी व्यापार रणनीति के केन्द्र में

रायपुर, अप्रैल, 2026: भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी वेदांता एल्युमीनियम को 2025 में जारी होने वाली अपनी पहली ’टास्क फोर्स ऑन नेचर-रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्क्लोजर (टीएनएफडी) रिपोर्ट’ के लिए ’अर्ली अडॉप्टर’ (सबसे पहले अपनाने वाली) कंपनी के तौर पर पहचान मिली है। कंपनी ने 2050 तक ’नो नेट लॉस’ के अपने लक्ष्य को भी दोहराया, जो प्रकृति और जैव-विविधता को अपने मूल व्यापार ढाँचे (कोर बिजनेस फ्रेमवर्क) में शामिल करने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है।टीएनएफडी, वेदांता एल्युमीनियम के प्रकृति संबंधी जोखिम प्रबंधन के दृष्टिकोण को मज़बूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस समीक्षा द्वारा कंपनी अपने प्रचालन में अपनी निर्भरताओं, प्रभावों और जोखिमों को दर्ज किया है, और अपनी मूल्य श्रृंखला में ज़रूरी इकोसिस्टम और मैटेरियल वॉटर तथा जैव-विविधता संबंधी चुनौतियों की पहचान की है। यह अभ्यास कंपनी के प्रकृति संबंधी मुद्दों को फैसलों में शामिल करने की क्षमता को बढ़ाता है। इस कदम के साथ, वेदांता एल्युमीनियम, टीएनएफडी फ्रेमवर्क अपनाने वाली दुनिया की चुनिंदा धातु एवं खनन कंपनियों के समूह में शामिल हो गई है।वेदांता एल्युमीनियम के सीईओ राजीव कुमार ने कहा, ’’टीएनएफडी को सबसे पहले अपनाने वाली कंपनियों में से एक के रूप में पहचान मिलना, हमारे मूल व्यापार की निर्णय प्रक्रिया में प्रकृति संबंधी मुद्दों को शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारा ध्यान पारदर्शिता को सुदृढ़ करने, प्रकृति से जुड़े जोखिमों को दूर करने और संसाधनों का सही उपयोग करके ज़िम्मेदारी से विकास को आगे बढ़ाने पर है। इस तरीके से, हमारा मकसद सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए दीर्घकालिक मूल्य रचना करना है।’’कंपनी की तरक्की को उसके पर्यावरणीय प्रदर्शन में हुए मापने योग्य सुधारों से समर्थन मिलता है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 तक 29 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए हैं और वि.व. 2030 तक 70 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य है। ये कोशिशें प्राकृतिक वास की बहाली, कार्बन ज़ब्ती और मृदा संरक्षण में मदद करती हैं। कंपनी ने पारिस्थितिक लाभ प्रदान करते हुए संरचनात्मक वनस्पति को पुष्ट करने के लिए बांस के बागान जैसे प्रकृति-आधारित समाधान अपनाए हैं। इसके अलावा, स्थानीय जैव-विविधता को बढ़ाने और प्रचालन क्षेत्रों के आसपास फलती-फूलती पारिस्थितिकी प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए फलों के बाग, औषधीय पौधों के बगीचे और कृत्रिम घोंसलों का निर्माण शामिल है।वेदांता एल्युनियम ’नेचर एक्शन’ के साथ-साथ अपने ’डीकार्बनाइजेशन रोडमैप’ को आगे बढ़ा रही है। वि.व. 2021 से, कंपनी ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घनत्व को 8.96 प्रतिशत तक कम किया है, जिससे उत्पादन बढ़ने के बावजूद प्रति टन एल्युमिनियम 17.01 टीसीओटूई हासिल हुआ है। वि.व. 2025 में, कंपनी ने 1.57 अरब यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया और अपने प्रचालन में रिन्यूएबल मिक्स बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।अपने संसाधन निपुणता दृष्टिकोण को और मजबूत करते हुए, कंपनी ने फ्लाई ऐश का 100 प्रतिशत इस्तेमाल किया है, जिससे उसकी सर्कुलर इकोनॉमी प्रैक्टिस और मजबूत हुई है। जल प्रबंधन हेतु की गई कंपनी की पहलों का परिणाम यह हुआ है कि हर साल 1.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी का पुनर्चक्रण (रीसायकल) हुआ है, जिसकी जल पुनर्चक्रण दर 15.6 प्रतिशत है और नेट वॉटर पॉज़िटिविटी हासिल करने का एक रोडमैप भी तैयार हुआ है।वेदांता एल्युमीनियम का संवहनीयता प्रदर्शन (सस्टेनेबिलिटी परफॉर्मेंस) अंतर्राष्ट्रीय मानकों एवं ढाँचों के मुताबिक परखा जाता है। कंपनी को एस एंड पी ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ईयरबुक 2026 में शामिल किया गया, जिसमें कंपनी दुनिया की शीर्ष 10 प्रतिशत कंपनियों में शामिल हुई है और लगातार तीसरे साल अपने सेक्टर में दूसरी रैंक पर रही है। यह पहचान पारदर्शिता, दायित्वपूर्ण वृद्धि और निरंतर सुधार के लिए कंपनी की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।




