40 वर्षों की दीवानगी: बिलासपुर के ‘संजू बाबा’ चुट्टू अवस्थी ने संजय दत्त की प्रशंसकता को बना दिया इतिहास

बिलासपुर, 29 जुलाई 2026। चार दशक… एक अभिनेता… एक वादा… और ऐसा समर्पण, जिसने एक प्रशंसक को पूरे छत्तीसगढ़ में पहचान दिला दी। अभिनेता संजय दत्त का जन्मदिन इस बार भी बिलासपुर के मध्यनगरी चौक में उनके प्रख्यात प्रशंसक चुट्टू अवस्थी ने पूरे उत्साह, भव्यता और जनसहभागिता के साथ मनाया। यह सिर्फ जन्मदिन का आयोजन नहीं, बल्कि 40 वर्षों से निभाई जा रही अटूट निष्ठा, प्रेम और समर्पण की जीवंत तस्वीर बनकर सामने आया।चुट्टू अवस्थी की यह अनोखी यात्रा वर्ष 1986 में फिल्म ‘नाम’ से शुरू हुई। इसके बाद ‘फतेह’ और ‘खलनायक’ जैसी फिल्मों ने उनके लगाव को ऐसा जुनून बनाया कि महज 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने हर वर्ष 29 जुलाई को संजय दत्त का जन्मदिन मनाने का संकल्प लिया। तब से यह सिलसिला बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है।समय के साथ यह आयोजन समाजसेवा का अभियान बन गया। हर नवरात्रि में मरीमाई मंदिर में संजय दत्त के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कराई जाती है। जन्मदिन पर अनाथालय, वृद्धाश्रम, नेत्रहीन विद्यालय और जरूरतमंदों के बीच फल, मिठाई और राशन वितरण उनकी पहचान बन चुका है। संजय दत्त की जेल से रिहाई पर उन्होंने 100 किलो लड्डू बांटे और शहर में रैली निकाली, जबकि वर्ष 2013 में अभिनेता के अस्वस्थ होने पर महामृत्युंजय जाप भी कराया।कोरोना काल में भी उनका संकल्प नहीं डिगा। उन्होंने सफाई कर्मियों और जरूरतमंद परिवारों को राशन, फल और सैनिटाइजर वितरित कर जन्मदिन को सेवा दिवस के रूप में मनाया। फिल्म ‘संजू’ के प्रदर्शन पर पूरे थिएटर की बुकिंग कर शहरवासियों को फिल्म दिखाई। वर्ष 2025 में जन्मदिन आयोजन को लेकर एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उनका उत्साह और समर्पण नहीं डगमगाया।आज चुट्टू अवस्थी पूरे छत्तीसगढ़ में ‘संजू बाबा’ के नाम से पहचाने जाते हैं। जन्मदिन समारोह में कंपनी गार्डन टाइगर ग्रुप, मध्यनगरी ग्रुप, ब्राह्मण समाज, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शहर के वरिष्ठ नागरिक और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। सभी ने उनके 40 वर्षों के समर्पण की सराहना करते हुए संजय दत्त के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।बहरहाल, चुट्टू अवस्थी ने यह साबित कर दिया कि जब किसी जुनून में सेवा, आस्था और समाज के प्रति समर्पण जुड़ जाए, तो वह केवल प्रशंसक नहीं, बल्कि अपने शहर की पहचान बन जाता है।




